नज़ीर वानीः अशोक चक्र पाने वाले पहले कश्मीरी सैनिक, जो पहले चरमपंथी थे

गांव में पसरा सन्नाटा थोड़ी देर में ही गोलियों की आवाज़ से बिखर गया. दरअसल, भारतीय सेना को ख़बर मिली कि इस गांव में छह भारत-विरोधी चरमपंथी छिपे हुए हैं.

भारतीय सेना के एक कश्मीरी जवान नज़ीर वानी उस रात इस आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन में भाग लेने के लिए काफ़ी उत्साहित थे.

वानी इस ऑपरेशन में अपने दोस्त मुख़्तार गोला की हत्या का बदला लेना चाहते थे. जिसकी मौत एक चरमपंथी गोलाबारी में हुई थी.

इस हफ़्ते, भारत सरकार ने लांस नायक नज़ीर अहमद वानी को आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनकी भूमिका के लिए मरणोपरांत ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित करने की घोषणा की है.

वानी कश्मीर के पहले शख़्स हैं जिन्हें ये सम्मान दिया जा रहा है.

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भारतीय सेना ने अपने बयान में वानी को एक ‘बहादुर सैनिक’ बताया है, जो साल 2004 में सेना में आने से पहले एक चरमपंथी थे.

सेना ने कहा, ”अपने सक्रिय जीवन के दौरान उन्होंने हमेशा खुशी के साथ ख़तरों का सामना किया और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे. ”

नज़ीर वानी के छोटे भाई मुश्ताक़ वानी ने कहा, “वानी कभी भी चरमपंथी नही रहे, हां वे इख़वान-उल-मुस्लिमीन (मुस्लिम ब्रदर्स) में शामिल हुए थे, ये स्थानीय आत्मसमर्पण कर चुके चरमपंथियों के समूह है.”

नज़ीर वानी
Image captionकश्मीर में नज़ीर वानी की क़ब्र

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वानी पिछले एक साल में भारतीय प्रशासित कश्मीर के कुलगाम जिले में दो दर्जन से ज़्यादा चरमपंथियों से हुई मुठभेड़ में शामिल रहे.

अपनी बहादुरी के लिए उन्हें 2007 और 2018 में ‘सेना मेडल फ़ॉर गैलेंट्री’ से सम्मानित किया गया.

नज़ीर वानी के घर में उनकी पत्नी और दो बेटे अतहर और शाहिद हैं. अतहर की उम्र 20 साल और शाहिद की उम्र 18 साल है.

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