छोटी सेविंग से लॉंग टर्म में बड़ी कैपिटल बनाने में हेल्प करेगा ‘SIP’

सिप म्यूचुअल फंड में निवेश का एक विकल्प है। इसके जरिये आप एक तय राशि हर महीने, तीन महीने या तय समय पर निवेश कर सकते हैं।

क्या है सिप
सिप म्यूचुअल फंड में निवेश का एक विकल्प है। इसके जरिये आप एक तय राशि हर महीने, तीन महीने या तय समय पर निवेश कर सकते हैं। यदि आप 5,000 रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं और एक बार में यह पैसा नहीं लगा सकते तो 10 किस्तो में 500 रुपये के हिसाब से सिप के जरिए निवेश कर सकते हैं।
कितना मिलेगा रिटर्न

सिप ने पिछले 10 वर्षो में 15 फीसदी के करीब औसत रिटर्न दिया है। शीर्ष पांच बेहतर प्रदर्शन करने वाले सिप ने 10 वर्षो में 20 से 22.49 फीसदी के बीच रिटर्न दिया है। जबकि पांच साल की अवधि में शीर्ष पांच सिप ने 21 फीसदी से 29 फीसदी के बीच रिटर्न दिया है।

एक हजार रुपये निवेश से लखपति
सिप में एक हजार रुपये 20 साल के लिए 15 फीसदी के अनुमानित रिटर्न पर हर माह निवेश करते हैं तो वह 13.11 लाख रुपये हो जाएगा। इसमें आप सिर्फ 2.40 लाख रुपये जमा करते है और 10.71 लाख रुपये अतिरिक्त रिटर्न के रूप में मिलते हैं। यह चक्रवृद्धि ब्याज की वजह से होता है।

लंबी अवधि में पांच गुना कमाई

आप सिप में एक हजार रुपया हर महीने 15 फीसदी के अनुमानित रिटर्न पर निवेश करते हैं तो 10 साल में यह बढ़कर करीब 2.60 लाख रुपये हो जाएगा। जबकि 20 साल में आपको 13.11 लाख रुपये मिलते हैं। इस तरह 10 के बदले 20 साल के सिप से आपको करीब पांच गुना ज्यादा फायदा होता है।

 सिप घटाता है निवेश पर जोखिम

शेयर में आप एकमुश्त 12 हजार रुपये लगाते हैं और एक महीने बाद बाजार में 10 फीसदी गिरावट आती है तो आपका निवेश घटकर 10,800 रुपये रहा जाता है। एक माह बाद यदि 10 फीसदी की तेजी आती है तो आपका निवेश बढ़कर 11,880 रुपये हो जाएगा। लेकिन इसके बावजूद मूल निवेश से 120 रुपये कम होगा जो सीधे तौर पर नुकसान है। वहीं सिप में आप पहले महीने एक हजार रुपये लगाते हैं तो 10 फीसदी गिरावट पर आपका निवेश घटकर 900 रुपये हो जाएगा। उसके अगले माह एक हजार रुपये निवेश से आपका कुल निवेश बढ़कर 1,900 रुपये हो जाएगा। अब दो माह बाद बाजार में 10 फीसदी तेजी आती है तो आपका निवेश बढ़कर 2090 रुपये हो जाएगा। इस तरह दो माह में ही आपको 90 रुपये का यानी 4.50 फीसदी का फायदा होगा। इस तरह सिप से निवेश पर जोखिम घटता है।
निवेश के कई विकल्प
सिप के तहत कंपनियां निवेशकों कोकई विकल्प देती हैं जिसमें डेट फंड और इक्विटी फंड सहित अन्य स्कीम शामिल हैं। साधारण सिप में निवेशक उन कंपनियों के म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं जो फंड की राशि शेयरों में लगाती हैं। इसमें एक अनुपात तय होता है कि कितनी राशि शेयरों में और कितनी अन्य माध्यम में लगी होगी। लेकिन इक्विटी सिप में निवेशक की राशि से उसके चुने हुए शेयर खरीदे जाते हैं। इसके लिए राशि और समय पहले से तय होता है। इक्विटी सिप में साधारण सिप की तुलना में जोखिम ज्यादा है लेकिन इसमें रिटर्न भी बहुत अधिक है।
टॉप-अप और पॉज सिप
सामान्य सिप में एक तय राशि जमा की जाती है। लेकिन कंपनियां सिप की वर्तमान राशि को फीसदी में या एक तय राशि में बढ़ाने का विकल्प भी देती हैं। इसको टॉप-अप या स्टेप-अप सिप कहा जाता है। आप वेतनभोगी हैं तो आपके वेतन में हर साल कुछ वृद्धि होती है। उस बढ़ी हुई आमदनी का एक हिस्सा टॉप-अप सिप के जरिये बढ़वाकर अधिक कमाई कर सकते हैं। जिस सिप में निवेश को बीच में कुछ दिन के लिए रुकवाने की सुविधा रहती है उसे पॉज सिप कहते हैं। नौकरी छूट जाने या अचानक मोटा खर्च आ जाने की स्थिति में आप पॉज का विकल्प चुन सकते हैं।
वैल्यू सिप का फायदा
जिस सिप में निवेश मूल्य घटने-बढ़ने के अनुसार राशि में बदलाव का विकल्प होता है उसे वैल्यू सिप कहते हैं। आप सिप में हर माह 1,000 रुपये जमा कर रहे हैं और शेयर बाजार में गिरावट आने पर निवेश घटकर 800 रुपये आ जाता है तो आप 1,200 रुपये जमा कर सकते हैं। इसी तरह बाजार में तेजी पर निवेश मूल्य बढ़कर 1,200 रुपये हो गया तो आप 800 रुपये जमा कर सकते हैं। इसका मकसद सिप में निवेश को आसान बनाना और बाजार में गिरावट का भी फायदा लेना है।
पिछले 10 साल में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच सिप ने 8.12 से 8.66 फीसदी के बीच रिटर्न दिया है। यह सावधि जमा (एफडी) और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर मिलने वाले ब्याज से अधिक है। जबकि पांच साल में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शीर्ष पांच सिप ने 9.80 से 11.65 फीसदी के बीच रिटर्न दिया है।

Sources : – livehindustan.com

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